Thursday, 26 January 2017

देश और ईमान

देश और ईमान

मेरा देश मेरा भारत बेशक एक महान मुल्क है । इस देश के चलाने वाले और इस देश में रहने वाले लोग भले ही खुद को बहुत बड़ा देश भक्त मानते हों पर असलियत कुछ और ही है । एक आम आदमी किसी पान की दूकान पे खड़ा होकर देशभक्ति की बातें करता हैं और बहुत से देशद्रोहियों के नाम गिना देता है और अगले ही कुछ पल में खाते हुए पान को किसी दीवार या सड़क पर थूक देता है ।
हमारी देशभक्ति सिर्फ तब ही क्यू जागती है जब हमें किसी और को देशद्रोही बनाना हो ?
हमारी देशभक्ति तब क्यू जागती है जब हमें पाकिस्तान को गाली देनी हो ?
हमारी देशभक्ति तब क्यू जागती है जब हमें किसी दूसरी पार्टी के नेता को बुरा बोलना हो ?

बिना टिकेट के सफर करना हमें बड़ा अच्छा लगता है , पानी या गुटखा खा कर कहीं भी थूक देना आम है हमारे लिए , कोई पेपर या रद्दी हम सड़क पे फेक देते हैं , २६ जनवरी और १५ अगस्त के दिन हम तिरंगा खरीदते हैं और अगले दिन वो सड़क पर गिरा हुआ मिलता है , क्या यही है आपकी और हमारी देशभक्ति ?
आप अपने देश को प्रतिदिन बेच रहे हो और बात करोगे देशप्रेम की , शर्म आनी चाहिए हम सबको , किसी धोका दे रहे हैं हम ? इस सरकार को जो हर ५ साल में बदल जाती है? या अपने आप को ?
ट्रैफिक - सिग्नल तोडना हमारे लिए आम बात है , पकडे जाने पे ट्रैफिक पुलिस से १००-५० ले देकर काम सुलटा लेते हो , और देश को बेच देते हो ।
कोई सरकारी काम करना हो ले देकर हो जाता है , चाहे आपको पासपोर्ट बनवाना हो या आपको अपने लिए लोन पास करवाना हो , कुछ भी होता है आपको ले देकर काम निकालना अच्छे से आता है पर शायद आपको पता नही आप उसी वक़्त अपने देश को बेच रहे हो ।  ये कड़वा सच आपको हज़म नही होगा पर यही सच है ।
दुश्मन हैं आप अपने ही मुल्क के , चाहे आप गला फाड़ कर कितना भी देशप्रेम ब्यान करें पर असल तो वही है जो आप करते हैं ।
कोई भी काम करने से पहले एक बार सोच ज़रूर लो की कहीं आप अपना मुल्क और अपना ईमान दोनों बेच तो नही रहे हैं ?
आप चाहे जिस धर्म के मानने वाले हों आपका धर्म आपको अपने मुल्क से मोहब्बत करना ही बताता है।
और मोहब्बत करते हो अगर अपने मुल्क से तो देश की गन्दगी दूर करो चाहे वो घूषखोरी हो , कचरा हो , अशांति हो , जात-पात हो ।
मेरा भारत महान था और हमेशा रहेगा अगर आप लोग अपना देशप्रेम सिर्फ बोलने की बजाए कर के दिखाएँ तो ।

छमा चाहता हूँ अगर किसी को इस बात का बुरा लगा हो ये मेरी अपनी सोच है ज़रूरी नही की आप इससे सहमत ही हों । आप अपनी राये निचे कमेंट में शेयर कर सकते हैं । धन्यवाद्

जय हिन्द जय भारत

Sunday, 15 January 2017

Swach Insaaniyat Abhiyaan

Kisi ki aankh me chubhta hun kisi ki jaan hun main,
Ye nafratein ye mohabbatein mere naam se karte hain,
Main "Ram" hun to acha hun "Raheem" hun to bura,
Ye meri pahchan mere naam se karte hain,
Wo Hindu hai to dushman hi hoga mera,
Aisa andaaza to kuch musalman bhi karte hain,
Kisi bekosoor ko mazhab ke naam pe maar dena,
Aisi Nafrat to bas insaan hi karte hain,
Kisi ko apne pass baithne bhi nhi dete,
Kisi ko uthkar Salaam bhi karte hain,
Tum Nafrat Failaao Hum Mohabbat Batenge,
Tum apna kaam karo Ham apna kaam karte hain,
Tum Gaali doge to ham salaam karenge,
Ham to nafraton ka bhi Ehtraam karte hain,
Hame na "Ram" Samjhna na "Raheem" aye "Azam",
Ham dil se burayi hata kar "Swach* Insaaniyat Abhiyaan*" Karte hain.

*Swach=Clean *Abhiyan=campaign *Gaali=Abuse

Inspired By "Mohabbat Ke Dange"



Tuesday, 10 January 2017

Wahi to mujhme basti hai ab meri jaan se pahle..

Bahut khush to nahi tha main Teri pahchan se pahle
Magar main hans to leta tha aqsar sham se pahle

Mere dil ne bhi kiya to tha ishara is tabahi ka
Jo aqsar lag hi jata hai bade tufaan se pahle

Mohabbat dekh ye tune mujhe buzdil bana daala
Main darta to nhi tha yun kisi insaan se pahle

Mohabat han magar tune mujhe banda bana dala
Main kuch bhi mangta to nhi tha bhagwan se pahle.

Jis shaks ka ye dhadkne ab naam leti hain,
Usi se barso rahe ham kitne anjaan se pahle.

Meri duniyan meri izzat "Azam" wahi to hai ab,
Wahi to mujhme basti hai ab meri jaan se pahle.