Wednesday, 4 October 2017

मुसलमान पढ़े गीता, हिन्दू पढ़े क़ुरआन

मुसलमान पढ़े गीता, हिन्दू पढ़े क़ुरआन
ऐसा ही काश होता ये अपना हिंदुस्तान।

मुझे इस बात से फ़र्क़ ही नहीं पड़ता कि गीता किसने लिखी क्यों लिखी या क़ुरआन कहाँ से आया और क्यों आया। ना इस बात से फ़र्क़ पड़ता है कि कौन इसे पढ़ता है।
तकलीफ तो तब होती है जब वो इंसान जिसने कभी इन किताबों को पढ़ा भी ना हो और इनकी बातें करता हो। फ़र्क़ तो तब पड़ता है जब लोगों को मारने वाला इन किताबों से या इनके धर्मों से जोड़ा जाता है। फिर चाहे वो कोई आतंकवादी संगठन हो या गाय के नाम पे क़त्ल करने वाले आतंकवादी।
अल्लाहू अकबर बोलकर किसी बेगुनाह को मारना हो या जय श्री राम बोलकर किसी को क़त्ल करना या किसी मस्जिद को शहीद करना। दोनो ही पाप है और दोनों का ही गीता और क़ुरआन से कोई वास्ता नही है।
मुझे ऐसे लोगों से कोई शिकायत नही है , शिकायत तो उन लोगों से है जो इनकी वजह से क़ुरआन और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों और उनके धोर्मो के बारे में गलत धारणा बनाते हैं।
मुझे नहीं पता कि ये क़त्लेआम कब रुकेगा या रुकेगा भी की नही, पर अगर हम लोगों की सुनने से पहले खुद समझने लगें क़ुरआन के साथ गीता और गीता के साथ क़ुरआन पढ़ने लगें तो ऐसे लोगों का मक़सद कभी पूरा नही होगा जो सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाना है।
हिन्दू धर्म जो भी कहता है वो गीता में है और इस्लाम जो कहता है वो क़ुरआन में है। आप पढ़ो ना ये किताबें पढ़ो , क्यों किसी से सुनकर या किसी को देख कर फैसला करते हो। पढ़ो और पढ़ कर फैसला करो।
नफरत फैलाने से कुछ हासिल नही होगा , जिस समाज को हम नफरतों का बीज बो रहे हैं , हम भी तो उसी समाज का हिस्सा हैं। देखिये कहीं ऐसा ना हो कि पड़ोसी के घर मे लगाई गई आग से आपका मकान भी ना जल जाए।
हर धर्म सिखाता है दूसरे के धर्म को सम्मान देना। और अगर हम ऐसा नही कर रहे तो दरअसल हम अपने धर्म को ही अपमानित कर रहे हैं।
याद रखें आप का चरित्र आपके धर्म की अच्छी या बुरी छवि लोगों को दिखाता है। मुझे यकीन है कि आप जिस भी धर्म के हों आपका धर्म अच्छा ही है, पर आप भी उसे वैसा ही दिखाने की कोशिश करें।

Saturday, 30 September 2017

शक्तिमान और देश का प्रधान

वैसे तो मुझे पता था कि गंगाधर ही शक्तिमान है , पर फिर भी कभी कभी दिल चाहता था
कि काश मैं भी शक्तिमान होता तो कितना अच्छा होता। आसमान में उड़ता , पतंगे तोड़ता
हवाई जहाज़ के साथ साथ उड़ता, जहां दिल चाहता चला जाता। लोगों में कितना नाम होता।
लेकिन कभी ये नही सोचा कि शक्तियों के साथ ज़िम्मेदारियाँ भी आती हैं।

आज जब अपने प्रधान सेवक को देखता हूँ तो लगता है कि इनको भी यही ख्वाहिश थी।
इनको देश की जनता ने बहुत शक्तिशाली बना दिया है और साथ मे बहुत ज़िम्मेदारियाँ
भी दी हैं । पर इनको देख कर लगता है कि ये भी मेरी तरह सिर्फ शक्तियों के बारे में सोचते थे,
ज़िम्मेदारियों का तो ख्याल ही नही है। ये तो शक्तिमान बनकर बस हवा में रहते हैं और मेरी तरह
पतंग की जगह ये लोगों की हड्डियां तोड़वाते हैं। और इनके बारे में लिखने के लिए एक नही बहुत से
गीता रिपोर्टर हैं।

मेरी तरह इनको भी शौक है कि इनका नाम हो और देखो ना सिर्फ नाम के लिए ही 3600 करोड़
की मूर्ति बनवाई जा रही वो भी परम मित्र चीन से। और 1 लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन तो देश का
नाम इतना ऊंचा कर देगी की हमे मंहगी वाली दूरबीन चाहिए नाम देखने के लिए।

परंतु मैं तो एक बच्चा था पर हमारे प्रधान मंत्री जी तो बड़े हो गए हैं ना। या फिर शायद लोगों
ने सही कहा है कि इंसान जब ज़्यादा बुढ़ा होने लगे तो उसकी अक़ल बच्चों जितनी हो जाती है।

Wednesday, 16 August 2017

देशभक्ति का सबूत

मैन लोगों से सुना है कि बेवकूफ लोगों के सवाल का सबसे अच्छा जवाब है चुप रहना जिससे कि मैं भी सहमत हूँ।
पिछले कुछ सालों से सवाल बहुत होने लगे हैं।
आम आदमी सरकार से सवाल करता है तो सरकार चुप रहती है। सरकार को आम आदमी का सवाल बेवकूफों वाला लगता है और लगे भी क्यों नहीं, जब हमने सरकार को 15 लाख रुपए और मंदिर मस्जिद के नाम पे वोट दिया है तो हम उनसे महंगाई और पढ़ाई का सवाल पूछें ही क्यों।
मेरा ये लेख दूसरे सवालों के लिए है जो कुछ फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी लोग देश के मुसलमानों से पूछ रहे हैं , आज हर कदम पे मुसलमान को एक हिंदुस्तानी होने का सबूत देने को कहा जाता है , फिर वो चाहे भारत माता की जय बोलना हो या वन्देमातरम या मदरसों में वीडियो शूट करने की बात।
मैं उन फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों से कुछ कहना ही नही चाहता क्यों की मेरा भी यही मानना है कि बेवकूफ के सवाल का जवाब चुप रहना है।
मैं बस यही बात देश के मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि जिनके सामने वो अपनी देशभक्ति दिखा रहे हैं दरअसल वो इस काबिल ही नहीं।
और आपको क्या लगता है कि आप उनको देशभक्ति दिखाओगे और वो आपको पसंद करने लग जाएंगे?
अगर ऐसा सोचते हो तो नादान हो।
पुरानी हिंदी फिल्मों में देखा है कभी? हीरो (नायक) को किसी ग़लत मुक़दमे में फसा कर उससे अपने अच्छे होने का सबूत मांगा जाता है , सबूत मांगने वाला कत्तई नही चाहता कि हीरो को सबूत मिले , और अगर कहीं से सबूत मिल भी गया तो विलीन उस सबूत को झुठलाने की पूरी कोशिश करता है। और अगर सबूत झुठला नही पाता तो हीरो के वकील का खून करवा देता है।अब यही बात आज हिंदी मुसलमानो के साथ हो रही है।
पर यहां पे ना सामने वाला वकील असली है ना जज और ना ही तुमपर लगाए गए इल्ज़ाम। तो बंद करो अपने आप को साबित करना , क्यों कि तुम जितना साबित करोगे तुमसे उतना ही सबूत मांग जाएगा और तबतक मांगा जाएगा जबतक तुम थक कर अपना जुर्म कबूल ना कर लो जो तुमने किया भी नही।
जितना मैं समझा हूँ उतना आपको समझाने की कोशिश की है।
ये ज़रूरी नहीं कि मैं जो सोचता हूँ वो आप भी सोचो या मेरा सोचना सही है या ग़लत , मैं जो सोचता हूँ वो मैंने लिख दिया। आप चाहें तो अपनी सोच मेरे साथ शेयर कर सकते हैं।
धन्यवाद

#WordsOfAzam

मैं भी तन्हा हुँ , है मेरा घर तन्हा

मैं भी तन्हा हुँ , है मेरा घर तन्हा
बिन तेरे हैं ये शाम-ओ-सहर तन्हा।
मंज़िल पे मिलेंगे मेरे अपने बहुत
मगर करना है पूरा ये सफर तन्हा।
तेरे आने की कोई उम्मीद तो नहीं
राह देखेंगे फिर भी उम्र भर तन्हा।
इश्क़ हो जाये तो फिर चैन कहाँ
भटकते हैं लोग दर ब दर तन्हा।
दिन तो गुज़ार लेते हैं जैसे तैसे
अश्क़ बहाते हैं रात भर तन्हा ।
आते हैं अकेले ही सभी लोग यहां
और ज़िन्दगी भी करते हैं बसर तन्हा।
धागा बांधते हैं जिसपर हमसफर के लिए
खड़ा खुद ही रहता है वो शजर तन्हा ।
क्या खूब ज़िन्दगी है "आज़म" की
रहता है दुनिया से बेखबर तन्हा।

Main bhi tanha hun, hai mera ghar tanha
Bin tere hain ye sham-o-saher tanha
Manzil pe milenge mere apne bahut
Magar karna hai pura ye safar tanha
Tere aane ki koi umeed to nahi
Raah dekhenge fir bhi umr bhar tanha
Ishq ho jaye to fir chain kahan
Bhatakte hain log dar ba dar tanha
Din to guzaar lete hain jaise taise
Ashq bahate hain raat bhar tanha
Aate hain akele hi sabhi log yahan
Aur zindagi bhi karte hain basar tanha
Dhaga bandhate hain jispar humsafar ke liye
Khada khud hi rehta hai wo shajar tanha
Kya khoob zindagi hai "Azam" ki
Rehta hai duniya se bekhabar tanha.


Monday, 14 August 2017

हम आज़ाद हैं

वो बच्चे हमसे कुछ कह रहे हैं जिनको हम ऑक्सीजन नही दे सके।

हम आज़ाद हैं
इस दुनिया से आज़ाद
इन लोगों से आज़ाद
ना हमे धर्म का डर
ना हमे जाति का डर
ना लड़की होने का डर
हमारी साँस रुक कर
हमे हर चीज़ से आज़ाद कर गयी
आक्सीजन की कमी से नही
इंसानियत की कमी से मरे हैं हम
अनजाने में ही सही
हम मर कर जी गए
ऐसे समाज मे जीना
मौत से भी बदतर है
जहाँ इंसान-इंसान के खून का प्यासा है
हमारे क़ातिल तुम्हारा शुक्रिया
तुमने हमे आज़ादी दी
अब तुम भी मनाओ
अपनी आज़ादी ।

क्या हम आज़ाद हैं?

क्या हम आज़ाद हैं?
किस बात की आज़ादी और कैसा जश्न? आज़ादी का मतलब होता क्या है? कभी किसी आज़ाद पंछी को देखा है ,  चाहे हवा उसके साथ हो या उसके खिलाफ वो अपनी परवाज़ अपने मन से ही करता है उसे जिस दिशा में जाना होता है वो उसी दिशा में जाता है फिर हवा उसके साथ चले या उसके खिलाफ उसे फ़र्क़ नही पड़ता। हाँ उसकी रफ्तार धीमी हो सकती है लेकिन उसकी परवाज़ बंद नही होती।
आज़ादी का मतलब होता है आज़ाद सोच, आज़ाद जिस्म नहीं । आज़ादी से पहले भी लोग आज़ाद थे, वो लोग जो जेलों में बंद थे वो आज़ाद थे वो लोग जो देश के लिए सूली पे चढ़ रहे थे वो आज़ाद थे वो लोग जिनके सीनों को गोलियों से भर दिया गया था वो लोग आज़ाद थे । अगर कोई गुलाम था तो वो थे जो खुद को गुलाम समझते थे और अंग्रेजों के सामने अपने घुटने टेक दिए थे। जो अंग्रेजों की चापलूसी करते थे वो ग़ुलाम थे। अगर आपकी सोच आज़ाद है तो आपको सात सलाखों के अंदर बंद करके भी गुलाम नही बनाया जा सकता।
लेकिन अफसोस कि बात है कि आज हम आज़ाद होते हुए भी ग़ुलाम है। हमारी सोच राजनीतिक पार्टियों की ग़ुलाम बनकर रह गयी हैं।
हर रोज़ कहीं न कहीं कोई ना कोई इस गुलाम मानसिकता का शिकार हो रहा है। किसी को धर्म के नाम पे किसी को जाति के नाम पे तो किसी को महिला होने की सज़ा मिल रही है।
हमे क्या खाना है क्या पहनना है , किसको कहाँ जाना चाहिए कहाँ नही सब उनके हाथ मे है जिनको हमने ही चुना है। फिर भी ना जाने हम किस नशे में होकर जश्ने आज़ादी मना रहे हैं।
हम आज़ाद उस दिन होंगे जिस दिन किसी रोहित को अपनी जाति की वजह से खुदखुशी ना करनी पड़े , हम आज़ाद उस दिन होंगे जब किसी अख्लाक के मरने पे मांस की जांच के बदले लाश की जाँच हो , हम आज़ाद उस दिन होंगे जब हमारे देश की बेटियां बाहर निकलने से पहले दिन रात ना देखें और ना उनके दिल मे कोई ख़ौफ़ हो। हम आज़ाद उस दी होंगे जब वोट मंदिर, मस्जिद, शमशान और कब्रिस्तान के नाम पर मांगना बंद हो जाये। जब ज़ात-पात, ऊंच-नीच, धर्म , स्त्री और पुरुष जैसे शब्दों को हम किसी की पहचान ना बनाएं , तो आज़ादी का जश्न भी मना लेंगे वो भी आज़ाद सोच के साथ। अगर इस लेख को पढ़ते वक्त आप मेरी जाति या मेरे धर्म का अनुमान लगाने लगे थे तो आप आज़ाद नही हैं , और हमें आज़ादी इसी सोच से चाहिये।
जय हिंद जय भारत




Friday, 28 July 2017

Dil ke kisi kone me jo rota hai baith kar,
Tanhayi me aankhon se nikalta hai wo aanshu.
Jazbaat ko ehsaas se jab samjha nahi jata,
Khamoshi janam leti hai fir rishton ke darmiyan.

Wednesday, 12 July 2017

बजरंग दल जैसे गिरोह का राम नाम से कोई वास्ता नहीं है

अमरनाथ यात्रियों के साथ जो भी हुआ बहुत दुख की बात है। और हम आशा करते हैं कि ऐसा फिर न हो और जिन लोगों ने भी ऐसा किया है उनको इस काम की सज़ा उन्हें जल्द दी जाए। हम सिर्फ आशा कर सकते हैं बाकी का काम सरकार ही करेगी।

यात्रा में जो लोग भी  मारे गए वो हिंदू है जिसकी वजह से हिन्दू लोगों की भावना आहत हुई।
कुछ लोगों ने अपना गुस्सा मुसलमानो पे निकाला जैसा कि ज़रूरी भी था वरना अमरनाथ में हुए हमले का कोई फायदा कैसे होता।
खुद को राम भक्त कहने वाले बजरंग दल और अन्य ऐसे गिरोह इस हादसे से शायद बहुत खुश हुए इसलिए अपनी खुसी का जश्न मनाने सड़कों पे निकल आये और मुसलमानों के साथ बुरा व्यवहार किया।
राम राज्य की बात करने वाले ये राम भक्त शायद राम राज्य का अर्थ नही समझते।
कभी कभी तो मुझे लगता है की आखिर ये लोग हैं कौन और क्यों राम नाम को बदनाम कर रहे हैं।
ये हिन्दू और राम का नाम ऐसे बदनाम कर रहे हैं जैसे ISIS  वालों ने इस्लाम और मुसलमानों का किया है।
आज जैसे हर मुसलमान को अच्छे और देशभक्त होने का सुबूत पेश करना पड़ता है कल यही हाल हिन्दू और राम भक्तों का इन बजरंग दल जैसे नकली भक्तों की वजह से न हो जाये।
राम नाम लेने से ही दिल को सुकून मिलता है और ये लोग राम जैसे पवित्र नाम को लेकर हिंसा करते है।
ये राम भक्त हो ही नही सकते। इससे पहले की आप हिन्दू और राम जी के बारे में अपनी कोई राय बनाये ये ज़रूर जान लें कि बजरंग दल जैसे गिरोह का राम नाम से कोई वास्ता नहीं है । ये बस राम का नाम प्रयोग करके राजनीति के वफादार कुत्ते बने हैं।
मैं बस एक यही कामना कर सकता हूँ कि एक दिन इस देश मे राम राज्य आ जाये। बजरंग दल वाले राम का नही बल्कि सीता के राम का। और फिर से एक बार राम का नाम सीता से जोड़ दिया जाए ।
जय श्री राम की जगह सीता राम कहा जाए।

Sunday, 5 March 2017

Mohabbat Sabko Hoti Hai

Mohabbat Sabko Hoti Hai,
Insaano ko parindo ko,
Farishton ko Darindon ko,
Kisi Ko Maa se Hai Ulfat,
Koi Rab Ka Deewana Hai,
Koi Hasta Hi Rahta Hai,
Koi Sabse Beghana Hai,
Kisi Ko Yaar Milta hai,
Kisi Ko Pyaar Milta Hai,
Koi Mujh Jaisa Bhi Hoga,
Jisko Aas Milti Hai,
Koi Umeed Ko Jugnu,
Jo Har Pal Jagmagata hai,
Kisi Ki Yaad Ke Saaye,
Kabhi aaram dete hain,
Tujhe Maloom Hai Jana,
Tu Harpal Door Hoti Hai,
Main Harpal Pass Hota hun,
Bahut Hi Pass akar main,
Tujko takta hi rahta hun,
Yun Kabtak Karunga main,
Kabhi Tu Pass aa mere,
Kabhi Tu sath aa mere,
Ki mera dil bhi dukhta hai,
Meri Aankhen Bhi Roti Hain,
Mere lab bhi sisakte hain,
Mujhe bhi log ab pagal,
Han Pagal Hi Samjhte hain,
Magar Unse kahe koi,
Mohabbat Sabko Hoti Hai,
Mohabbat Unko Bhi Hogi,
Pagal wo Bhi Honge Ek din,
Tab wo chup ho jayenge,
Mujhe pagal jo kahte hain,
Mere hi pass aayenge,
Chalo Jana main Chalta Hun,
Tum bhi aaogi na hasr me,
Chalo Fir Wahin Milta hun.

ALLAH HAFIZ






Kiski Nazron Me Acha Bnana Chahte Ho?
Wo Log Jinko Sirf Tumhare Bure Se Matlab Hai?

Agar logon ko Khush Karna hai to Bure Bano

Agar logon ko Khush Karna hai to Bure Bano , Q ki Log Tumko Acha bante Huye Dekhna Hi Nahi Chahte :)

Tumhe Pata hai Ye Pyaar Kya Hai?

Tumhe Pata hai Ye Pyaar Kya Hai?
Mujhe Pata hai Ye Kuch Nahi Hai.

Patte Tutate Hain Ped se isi Mausam Me

Patte Tutate Hain Ped se isi Mausam Me,
Tune Mera Dil Bhi isi Mausam me toda tha.

Tuesday, 21 February 2017

Repair the world with LOVE

The Cheapest way to show your love towards India is to hate Pakistan. And believe me if you are using this way to express your love then actually you are not loving your country anyway.Hating Pakistan is the easy option for every Indian to show something that can describe their nationalism.I do not know how it can describe love towards someone by hating someone.

I think every true country man should want peace in their country and do something that can help  their county to be a best country in the world.Hate only leads your country to the terror , riots and these are what will make your country only burn.
So please stop breaking world with your hate and start repairing it with your love.
By Being nice you can change someones mind from hate to love, at least you can change yours.And please do not do something that make someone to hate your country , whatever your country is.

Let me tell you something about Prophet Muhammad (salAllahu alayhi wsalam),

More than 1400 years ago one old woman made a habit of throwing rubbish on Prophet Muhammad (salAllahu alayhi wsalam) whenever he passed from her house! 
Even when the old woman threw rubbish on him, he would pass silently without showing any anger or annoyance. 
One day when the Prophet was passing by, the woman was not there to throw the rubbish. He stopped, and asked the neighbor about her well-being, and wondering why she wasn't dropping any rubbish on him. 
The neighbor informed the Prophet that the woman was sick on bed. The Prophet politely asked permission to visit the woman. When allowed he entered the house, the woman thought that he had come there to take his revenge when she was unable to defend herself because of sickness. 
But the Prophet (salAllahu alayhi wsalam) assured her that he had come to her, not to take any revenge, but to see her and to look after her needs, as it was the command of Allah that if any one is sick, a Muslim should visit him and should help him if his help is needed.

I know everyone of you is aware with this incident but how many of us is trying to be like that? 
I know we can not be like prophet but at least we can try to be.

The above statement is not about only Indian , it is about all the people who hates someones.
I wrote this without the fear of the sentence that is "Log Kya Kahenge".

#WordsOfAzam 

Tuesday, 14 February 2017

Log kahte hain aajka din hai pyaar ka din

Log kahte hain aajka din hai pyaar ka din,
Kaisa pyaar, kaisa din , sab adhura tere bin.

Friday, 10 February 2017

Insaniyat ki Kami

Is waqt insaano me sabse zada kisi chiz ki kami hai to , wo hai "Insaniyat".

Kabhi Kabhi ham kisi insaan ko itna dukh de dete hain

Kabhi Kabhi ham kisi insaan ko itna dukh de dete hain ki wo insaan apni maut ki dua karne lagta hai, par hame is baat ka zara sa bhi ehsas nahi hota.

Fact of our society is

Fact of our society is -
Jo jitna acha hai use log utni hi buri nazar se dekhte hain.

Kisi ache insaan ka itna mazaak bhi na banao...

Kisi ache insaan ka itna mazaak bhi na banao ki wo bura banane pe majboor ho jaaye.

Thursday, 26 January 2017

देश और ईमान

देश और ईमान

मेरा देश मेरा भारत बेशक एक महान मुल्क है । इस देश के चलाने वाले और इस देश में रहने वाले लोग भले ही खुद को बहुत बड़ा देश भक्त मानते हों पर असलियत कुछ और ही है । एक आम आदमी किसी पान की दूकान पे खड़ा होकर देशभक्ति की बातें करता हैं और बहुत से देशद्रोहियों के नाम गिना देता है और अगले ही कुछ पल में खाते हुए पान को किसी दीवार या सड़क पर थूक देता है ।
हमारी देशभक्ति सिर्फ तब ही क्यू जागती है जब हमें किसी और को देशद्रोही बनाना हो ?
हमारी देशभक्ति तब क्यू जागती है जब हमें पाकिस्तान को गाली देनी हो ?
हमारी देशभक्ति तब क्यू जागती है जब हमें किसी दूसरी पार्टी के नेता को बुरा बोलना हो ?

बिना टिकेट के सफर करना हमें बड़ा अच्छा लगता है , पानी या गुटखा खा कर कहीं भी थूक देना आम है हमारे लिए , कोई पेपर या रद्दी हम सड़क पे फेक देते हैं , २६ जनवरी और १५ अगस्त के दिन हम तिरंगा खरीदते हैं और अगले दिन वो सड़क पर गिरा हुआ मिलता है , क्या यही है आपकी और हमारी देशभक्ति ?
आप अपने देश को प्रतिदिन बेच रहे हो और बात करोगे देशप्रेम की , शर्म आनी चाहिए हम सबको , किसी धोका दे रहे हैं हम ? इस सरकार को जो हर ५ साल में बदल जाती है? या अपने आप को ?
ट्रैफिक - सिग्नल तोडना हमारे लिए आम बात है , पकडे जाने पे ट्रैफिक पुलिस से १००-५० ले देकर काम सुलटा लेते हो , और देश को बेच देते हो ।
कोई सरकारी काम करना हो ले देकर हो जाता है , चाहे आपको पासपोर्ट बनवाना हो या आपको अपने लिए लोन पास करवाना हो , कुछ भी होता है आपको ले देकर काम निकालना अच्छे से आता है पर शायद आपको पता नही आप उसी वक़्त अपने देश को बेच रहे हो ।  ये कड़वा सच आपको हज़म नही होगा पर यही सच है ।
दुश्मन हैं आप अपने ही मुल्क के , चाहे आप गला फाड़ कर कितना भी देशप्रेम ब्यान करें पर असल तो वही है जो आप करते हैं ।
कोई भी काम करने से पहले एक बार सोच ज़रूर लो की कहीं आप अपना मुल्क और अपना ईमान दोनों बेच तो नही रहे हैं ?
आप चाहे जिस धर्म के मानने वाले हों आपका धर्म आपको अपने मुल्क से मोहब्बत करना ही बताता है।
और मोहब्बत करते हो अगर अपने मुल्क से तो देश की गन्दगी दूर करो चाहे वो घूषखोरी हो , कचरा हो , अशांति हो , जात-पात हो ।
मेरा भारत महान था और हमेशा रहेगा अगर आप लोग अपना देशप्रेम सिर्फ बोलने की बजाए कर के दिखाएँ तो ।

छमा चाहता हूँ अगर किसी को इस बात का बुरा लगा हो ये मेरी अपनी सोच है ज़रूरी नही की आप इससे सहमत ही हों । आप अपनी राये निचे कमेंट में शेयर कर सकते हैं । धन्यवाद्

जय हिन्द जय भारत

Sunday, 15 January 2017

Swach Insaaniyat Abhiyaan

Kisi ki aankh me chubhta hun kisi ki jaan hun main,
Ye nafratein ye mohabbatein mere naam se karte hain,
Main "Ram" hun to acha hun "Raheem" hun to bura,
Ye meri pahchan mere naam se karte hain,
Wo Hindu hai to dushman hi hoga mera,
Aisa andaaza to kuch musalman bhi karte hain,
Kisi bekosoor ko mazhab ke naam pe maar dena,
Aisi Nafrat to bas insaan hi karte hain,
Kisi ko apne pass baithne bhi nhi dete,
Kisi ko uthkar Salaam bhi karte hain,
Tum Nafrat Failaao Hum Mohabbat Batenge,
Tum apna kaam karo Ham apna kaam karte hain,
Tum Gaali doge to ham salaam karenge,
Ham to nafraton ka bhi Ehtraam karte hain,
Hame na "Ram" Samjhna na "Raheem" aye "Azam",
Ham dil se burayi hata kar "Swach* Insaaniyat Abhiyaan*" Karte hain.

*Swach=Clean *Abhiyan=campaign *Gaali=Abuse

Inspired By "Mohabbat Ke Dange"



Tuesday, 10 January 2017

Wahi to mujhme basti hai ab meri jaan se pahle..

Bahut khush to nahi tha main Teri pahchan se pahle
Magar main hans to leta tha aqsar sham se pahle

Mere dil ne bhi kiya to tha ishara is tabahi ka
Jo aqsar lag hi jata hai bade tufaan se pahle

Mohabbat dekh ye tune mujhe buzdil bana daala
Main darta to nhi tha yun kisi insaan se pahle

Mohabat han magar tune mujhe banda bana dala
Main kuch bhi mangta to nhi tha bhagwan se pahle.

Jis shaks ka ye dhadkne ab naam leti hain,
Usi se barso rahe ham kitne anjaan se pahle.

Meri duniyan meri izzat "Azam" wahi to hai ab,
Wahi to mujhme basti hai ab meri jaan se pahle.