मैन लोगों से सुना है कि बेवकूफ लोगों के सवाल का सबसे अच्छा जवाब है चुप रहना जिससे कि मैं भी सहमत हूँ।
पिछले कुछ सालों से सवाल बहुत होने लगे हैं।
आम आदमी सरकार से सवाल करता है तो सरकार चुप रहती है। सरकार को आम आदमी का सवाल बेवकूफों वाला लगता है और लगे भी क्यों नहीं, जब हमने सरकार को 15 लाख रुपए और मंदिर मस्जिद के नाम पे वोट दिया है तो हम उनसे महंगाई और पढ़ाई का सवाल पूछें ही क्यों।
मेरा ये लेख दूसरे सवालों के लिए है जो कुछ फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी लोग देश के मुसलमानों से पूछ रहे हैं , आज हर कदम पे मुसलमान को एक हिंदुस्तानी होने का सबूत देने को कहा जाता है , फिर वो चाहे भारत माता की जय बोलना हो या वन्देमातरम या मदरसों में वीडियो शूट करने की बात।
मैं उन फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों से कुछ कहना ही नही चाहता क्यों की मेरा भी यही मानना है कि बेवकूफ के सवाल का जवाब चुप रहना है।
मैं बस यही बात देश के मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि जिनके सामने वो अपनी देशभक्ति दिखा रहे हैं दरअसल वो इस काबिल ही नहीं।
और आपको क्या लगता है कि आप उनको देशभक्ति दिखाओगे और वो आपको पसंद करने लग जाएंगे?
अगर ऐसा सोचते हो तो नादान हो।
पुरानी हिंदी फिल्मों में देखा है कभी? हीरो (नायक) को किसी ग़लत मुक़दमे में फसा कर उससे अपने अच्छे होने का सबूत मांगा जाता है , सबूत मांगने वाला कत्तई नही चाहता कि हीरो को सबूत मिले , और अगर कहीं से सबूत मिल भी गया तो विलीन उस सबूत को झुठलाने की पूरी कोशिश करता है। और अगर सबूत झुठला नही पाता तो हीरो के वकील का खून करवा देता है।अब यही बात आज हिंदी मुसलमानो के साथ हो रही है।
पर यहां पे ना सामने वाला वकील असली है ना जज और ना ही तुमपर लगाए गए इल्ज़ाम। तो बंद करो अपने आप को साबित करना , क्यों कि तुम जितना साबित करोगे तुमसे उतना ही सबूत मांग जाएगा और तबतक मांगा जाएगा जबतक तुम थक कर अपना जुर्म कबूल ना कर लो जो तुमने किया भी नही।
जितना मैं समझा हूँ उतना आपको समझाने की कोशिश की है।
ये ज़रूरी नहीं कि मैं जो सोचता हूँ वो आप भी सोचो या मेरा सोचना सही है या ग़लत , मैं जो सोचता हूँ वो मैंने लिख दिया। आप चाहें तो अपनी सोच मेरे साथ शेयर कर सकते हैं।
धन्यवाद
#WordsOfAzam
पिछले कुछ सालों से सवाल बहुत होने लगे हैं।
आम आदमी सरकार से सवाल करता है तो सरकार चुप रहती है। सरकार को आम आदमी का सवाल बेवकूफों वाला लगता है और लगे भी क्यों नहीं, जब हमने सरकार को 15 लाख रुपए और मंदिर मस्जिद के नाम पे वोट दिया है तो हम उनसे महंगाई और पढ़ाई का सवाल पूछें ही क्यों।
मेरा ये लेख दूसरे सवालों के लिए है जो कुछ फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी लोग देश के मुसलमानों से पूछ रहे हैं , आज हर कदम पे मुसलमान को एक हिंदुस्तानी होने का सबूत देने को कहा जाता है , फिर वो चाहे भारत माता की जय बोलना हो या वन्देमातरम या मदरसों में वीडियो शूट करने की बात।
मैं उन फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों से कुछ कहना ही नही चाहता क्यों की मेरा भी यही मानना है कि बेवकूफ के सवाल का जवाब चुप रहना है।
मैं बस यही बात देश के मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि जिनके सामने वो अपनी देशभक्ति दिखा रहे हैं दरअसल वो इस काबिल ही नहीं।
और आपको क्या लगता है कि आप उनको देशभक्ति दिखाओगे और वो आपको पसंद करने लग जाएंगे?
अगर ऐसा सोचते हो तो नादान हो।
पुरानी हिंदी फिल्मों में देखा है कभी? हीरो (नायक) को किसी ग़लत मुक़दमे में फसा कर उससे अपने अच्छे होने का सबूत मांगा जाता है , सबूत मांगने वाला कत्तई नही चाहता कि हीरो को सबूत मिले , और अगर कहीं से सबूत मिल भी गया तो विलीन उस सबूत को झुठलाने की पूरी कोशिश करता है। और अगर सबूत झुठला नही पाता तो हीरो के वकील का खून करवा देता है।अब यही बात आज हिंदी मुसलमानो के साथ हो रही है।
पर यहां पे ना सामने वाला वकील असली है ना जज और ना ही तुमपर लगाए गए इल्ज़ाम। तो बंद करो अपने आप को साबित करना , क्यों कि तुम जितना साबित करोगे तुमसे उतना ही सबूत मांग जाएगा और तबतक मांगा जाएगा जबतक तुम थक कर अपना जुर्म कबूल ना कर लो जो तुमने किया भी नही।
जितना मैं समझा हूँ उतना आपको समझाने की कोशिश की है।
ये ज़रूरी नहीं कि मैं जो सोचता हूँ वो आप भी सोचो या मेरा सोचना सही है या ग़लत , मैं जो सोचता हूँ वो मैंने लिख दिया। आप चाहें तो अपनी सोच मेरे साथ शेयर कर सकते हैं।
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