Wednesday, 4 October 2017

मुसलमान पढ़े गीता, हिन्दू पढ़े क़ुरआन

मुसलमान पढ़े गीता, हिन्दू पढ़े क़ुरआन
ऐसा ही काश होता ये अपना हिंदुस्तान।

मुझे इस बात से फ़र्क़ ही नहीं पड़ता कि गीता किसने लिखी क्यों लिखी या क़ुरआन कहाँ से आया और क्यों आया। ना इस बात से फ़र्क़ पड़ता है कि कौन इसे पढ़ता है।
तकलीफ तो तब होती है जब वो इंसान जिसने कभी इन किताबों को पढ़ा भी ना हो और इनकी बातें करता हो। फ़र्क़ तो तब पड़ता है जब लोगों को मारने वाला इन किताबों से या इनके धर्मों से जोड़ा जाता है। फिर चाहे वो कोई आतंकवादी संगठन हो या गाय के नाम पे क़त्ल करने वाले आतंकवादी।
अल्लाहू अकबर बोलकर किसी बेगुनाह को मारना हो या जय श्री राम बोलकर किसी को क़त्ल करना या किसी मस्जिद को शहीद करना। दोनो ही पाप है और दोनों का ही गीता और क़ुरआन से कोई वास्ता नही है।
मुझे ऐसे लोगों से कोई शिकायत नही है , शिकायत तो उन लोगों से है जो इनकी वजह से क़ुरआन और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों और उनके धोर्मो के बारे में गलत धारणा बनाते हैं।
मुझे नहीं पता कि ये क़त्लेआम कब रुकेगा या रुकेगा भी की नही, पर अगर हम लोगों की सुनने से पहले खुद समझने लगें क़ुरआन के साथ गीता और गीता के साथ क़ुरआन पढ़ने लगें तो ऐसे लोगों का मक़सद कभी पूरा नही होगा जो सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाना है।
हिन्दू धर्म जो भी कहता है वो गीता में है और इस्लाम जो कहता है वो क़ुरआन में है। आप पढ़ो ना ये किताबें पढ़ो , क्यों किसी से सुनकर या किसी को देख कर फैसला करते हो। पढ़ो और पढ़ कर फैसला करो।
नफरत फैलाने से कुछ हासिल नही होगा , जिस समाज को हम नफरतों का बीज बो रहे हैं , हम भी तो उसी समाज का हिस्सा हैं। देखिये कहीं ऐसा ना हो कि पड़ोसी के घर मे लगाई गई आग से आपका मकान भी ना जल जाए।
हर धर्म सिखाता है दूसरे के धर्म को सम्मान देना। और अगर हम ऐसा नही कर रहे तो दरअसल हम अपने धर्म को ही अपमानित कर रहे हैं।
याद रखें आप का चरित्र आपके धर्म की अच्छी या बुरी छवि लोगों को दिखाता है। मुझे यकीन है कि आप जिस भी धर्म के हों आपका धर्म अच्छा ही है, पर आप भी उसे वैसा ही दिखाने की कोशिश करें।

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