वैसे तो मुझे पता था कि गंगाधर ही शक्तिमान है , पर फिर भी कभी कभी दिल चाहता था
कि काश मैं भी शक्तिमान होता तो कितना अच्छा होता। आसमान में उड़ता , पतंगे तोड़ता
हवाई जहाज़ के साथ साथ उड़ता, जहां दिल चाहता चला जाता। लोगों में कितना नाम होता।
लेकिन कभी ये नही सोचा कि शक्तियों के साथ ज़िम्मेदारियाँ भी आती हैं।
आज जब अपने प्रधान सेवक को देखता हूँ तो लगता है कि इनको भी यही ख्वाहिश थी।
इनको देश की जनता ने बहुत शक्तिशाली बना दिया है और साथ मे बहुत ज़िम्मेदारियाँ
भी दी हैं । पर इनको देख कर लगता है कि ये भी मेरी तरह सिर्फ शक्तियों के बारे में सोचते थे,
ज़िम्मेदारियों का तो ख्याल ही नही है। ये तो शक्तिमान बनकर बस हवा में रहते हैं और मेरी तरह
पतंग की जगह ये लोगों की हड्डियां तोड़वाते हैं। और इनके बारे में लिखने के लिए एक नही बहुत से
गीता रिपोर्टर हैं।
मेरी तरह इनको भी शौक है कि इनका नाम हो और देखो ना सिर्फ नाम के लिए ही 3600 करोड़
की मूर्ति बनवाई जा रही वो भी परम मित्र चीन से। और 1 लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन तो देश का
नाम इतना ऊंचा कर देगी की हमे मंहगी वाली दूरबीन चाहिए नाम देखने के लिए।
परंतु मैं तो एक बच्चा था पर हमारे प्रधान मंत्री जी तो बड़े हो गए हैं ना। या फिर शायद लोगों
ने सही कहा है कि इंसान जब ज़्यादा बुढ़ा होने लगे तो उसकी अक़ल बच्चों जितनी हो जाती है।
कि काश मैं भी शक्तिमान होता तो कितना अच्छा होता। आसमान में उड़ता , पतंगे तोड़ता
हवाई जहाज़ के साथ साथ उड़ता, जहां दिल चाहता चला जाता। लोगों में कितना नाम होता।
लेकिन कभी ये नही सोचा कि शक्तियों के साथ ज़िम्मेदारियाँ भी आती हैं।
आज जब अपने प्रधान सेवक को देखता हूँ तो लगता है कि इनको भी यही ख्वाहिश थी।
इनको देश की जनता ने बहुत शक्तिशाली बना दिया है और साथ मे बहुत ज़िम्मेदारियाँ
भी दी हैं । पर इनको देख कर लगता है कि ये भी मेरी तरह सिर्फ शक्तियों के बारे में सोचते थे,
ज़िम्मेदारियों का तो ख्याल ही नही है। ये तो शक्तिमान बनकर बस हवा में रहते हैं और मेरी तरह
पतंग की जगह ये लोगों की हड्डियां तोड़वाते हैं। और इनके बारे में लिखने के लिए एक नही बहुत से
गीता रिपोर्टर हैं।
मेरी तरह इनको भी शौक है कि इनका नाम हो और देखो ना सिर्फ नाम के लिए ही 3600 करोड़
की मूर्ति बनवाई जा रही वो भी परम मित्र चीन से। और 1 लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन तो देश का
नाम इतना ऊंचा कर देगी की हमे मंहगी वाली दूरबीन चाहिए नाम देखने के लिए।
परंतु मैं तो एक बच्चा था पर हमारे प्रधान मंत्री जी तो बड़े हो गए हैं ना। या फिर शायद लोगों
ने सही कहा है कि इंसान जब ज़्यादा बुढ़ा होने लगे तो उसकी अक़ल बच्चों जितनी हो जाती है।

Mast hai bhai ultimate
ReplyDeleteGhazab
Shukriya bhai :)
Delete